Tuesday, September 4, 2012

शशक्त हम


धरा है बोझिल आज पाप तले
चहुँ ओर बस हाहाकार व्याप्त है
कहीं चीर हरण बेबस द्रोपदी का
भ्रष्टाचार का होता यहाँ शंखनाद है

रोज़ चढ़ता स्वार्थ की बलि बेदी पर
आम आदमी कर रहा त्राहिमाम है
ईश्वर भी है मौन, रोती खून के आसूं
इंसा की बेबसी, होता यहाँ तांडव नाच है

लाचार टूटते सपनो संग मानुष
कंठ अवरुद्ध, जीने को अभिशप्त है
आज बिकता ईमान कोड़ियों के भाव
नित इंसानियत का होता यहाँ क़त्ल है

कब तक रहेंगे बेबस यूहीं आसूं
उठो और जागृत करो सुप्त मन को
भर दो खुद मे शक्ति और अग्नि
दिखला दो हम कितने शाश्क्त है........किरण आर्य
 

Monday, September 3, 2012

दस्ताने लैला मजनू

लैला से प्यार करके मंजनू की किस्मत जाग गई,
गौर फरमाए लैला से करके प्यार 
मंजनू की किस्मत जाग गई,
मजनू ने लैला को इतने लव लेटर पोस्ट किए,
कि लैला उसे छोड़ पोस्टमॅन के साथ ही भाग गई !!


उस वक़्त तो मंजनू जार जार रोया,
घूमता था कपडे फाड़ के रहता था खोया खोया,
एक दिन पंहुचा वो लैला के ससुराल,
वहां जाकर उसने देखा पोस्टमन का था बुरा हाल,
देख पोस्टमन को बेहाल, मंजनू के खुल गए ज्ञान चक्षु !!


अता किया शुक्रिया खुदा का उसने,
ए खुदा तुने मुझे बाल बाल बचा लिया,
मेरी डूबती नैया को किनारे लगा दिया,
वर्ना मेरा भी होता यहीं मंज़र,
लैला तो है एक ख़ूनी खंज़र !!


वैसे ही लैला के प्यार में खाई बहुत ठोकर मैंने,
अब समझ आया यह प्यार क्या होता है,
न मिले तो दीवाना बना देता है,
लैला मंजनू का फ़साना बना देता है !!


गर मिल जाए दो दिन में दिखा देता यह कमाल,
और जीवन भर बस रह जाता है यहीं मलाल,
क्यों किया प्यार हमने किसी ने ठीक ही कहा है,
और भी गम है ज़माने में मोहब्बत के सिवा !!


सोच यहीं मंजनू के सर से उतर गया प्यार का भूत,
बोला अच्छा हुआ समय रहते खुल गए ज्ञान चक्षु,
और मैं गया इस माया मोह से छूट............किरण आर्य


केबीसी


केबीसी की देख बदती लोकप्रियता,
जा पहुचे हम भी केबीसी में,
देख आमिताभ जी को मन ही मन हर्षाये,
बैठ हॉट सीट पर भाग्य पर अपने इतराए !!

एक मीठी सी मुस्कान फेक बोले अमिताभ जी,
स्वागत है आपका आइये,
खेले कौन बनेगा करोड़पति देवी जी,
हम बोले जी सर पूछिए का पूछना है,
हमारा मन भी है बेताब,
जीतने को करोड़पति का खिताब !!

सुन हमारी प्यारी बतिया आमिताभ जी मुस्काए,
बोले हमारी शुभकामनाये है आपके साथ,
लीजिये पहले प्रश्न आया आपके पास,
तुरंत दीजिये इसका जवाब !!

इनमे से कौन द्रोपदी का पति नहीं था?
१) राम २) अर्जुन ३) भीम या ४) युधिष्टर?
सोचा हमने गौर से और फिर हम मुस्काये,
बोले पूरे कांफिडेंस से आप कृष्ण पर ताला लगाये !!

सुन जवाब हमारा आमिताभ जी चकराए,
बोले देवी जी अब यह कृष्ण कहाँ से आये?
राम है आप्शन में कृष्ण को हम कैसे ताला लगाये?

हम बोले देखिये सर जी राम का द्रोपदी से नहीं कोई नाता है,
इसीलिए लगा कृष्ण ही ठीक हमें, क्यूकि वो द्रोपदी के भ्राता है,
सुन हमारी ये बात आमिताभ जी हो गए हंसी से बेहाल,
बोले देवी जी आप तो है बेमिसाल !!

खुश हो पाते हम जरा सा सुन उनकी यह बात,
उससे पहले ही कानो से हमारे आ टकराई,
पति देव की मीठी आवाज,
सुबह हो गई श्रीमती जी कब तक रहोगी सपनो में,
अब तो छोड़ो निंदिया रानी का साथ,
मल अपनी आँखों को हम थोडा मुस्काए,
सोचा चलो सपने में ही सही आमिताभ जी तो हम मिल आये............किरण आर्य