Friday, December 6, 2013

तुम्हारे लिए

सुनो मैं छोड़ आई हूँ
पास तुम्हारे
एहसासों की तपिश
प्रेम की खुशबू
स्पर्श और छुअन
सिरहाने रख आई हूँ
कुछ हिदायते
सर्द सी ठिठुरती
कुछ बेचैनी
और कुनकुनी धूप सी
कुछ मुस्कुराहटें
पलंग की चादर से बाँध आई हूँ
कुछ यादें
और कंबल में सहेज रख आई हूँ
मीठी सी दुआ
बालकनी से झांकता छोड़ आई हूँ
इंतज़ार को
लौट तो आई हूँ मैं पर लगता है
जैसे खुद को ही छोड़ आई हूँ
पास तुम्हारे
महसूस करना हूँ हर पल
साथ तुम्हारे
महकती चहकती मुस्कुराती सी
हाँ तुम्हारी ही किरण
**************

Friday, November 29, 2013

उजास

स्तब्ध हर सांस है
रो रहा आकाश है
हर तरफ विनाश है
मानवता का ह्रास है !

सिसकते एहसास है
क्या ये विकास है ?
या सृष्टि का नाश है
देवों का जहाँ वास है
अब वहां विनाश है !

महत्वाकांक्षा की खाज़ है
रो रहा आह मधुमास है
मानुष तन जो खास है
रक्त रंजित सा मॉस है !

प्राण अब निश्वास है
भटकती सी प्यास है
अँधेरे जो बेआवाज़ है
मन के आस पास है !

फिर भी मन में विश्वास है
आने वाली सुबह एक उजास है
दीये सी झिमिलाती आस है
आँखों में चमकता प्रकाश है

होंटों पर निश्छल सा सुहास है
मन की ये अडिग आवाज़ है
जहाँ आस है जिंदगी में मिठास है
मधुर जो मिठास है सबसे खास है !!

**********************

Thursday, November 14, 2013

मन की आहट

सुनो ए मन मेरे 
एक रिश्ता है दरमियाँ मेरे और तेरे
उम्र के पड़ाव रिश्तों की खराश से परे
अभी तक जाना है मैंने तेरे
खिलखिलाते ठहाकों को जो
ख़ुशगवार झोंके से छूकर गुजर जाते
मेरे चेहरें पर गिरे गेसुओं को
प्रेम से स्निग्ध भावों को
जो तेरे अपने होने का भान करा जाते
बड़ी शिद्दत से मुझे
और सहला जाते मेरी उदासी को
तुम कहते हो मत कहलवाओ मुझसे
वह जो मैं कहना नहीं चाहता
बहुत कुछ आहटों से समझा करो
जिस दिन आहटों को
समझना सीख जाओगी
उस दिन कहने सुनने को
कुछ ना रहेगा शेष दरमियाँ हमारे
मूक बैठकर दूर रहकर भी
कर पायेंगे हर पहर हम
बातें अनगिनत बातें
बातें जो मैं बुनूं तुम समझ पाओ
बातें जो जोड़ेंगी हमें कुछ इस तरह
लगने लगूंगा तुम्हारा ही हिस्सा मैं
इसीलिए ए मन सीख रही हूँ मैं
महसूस करना पहचानना
एहसासों की आहट
उसके पदचापों की दस्तक
सुगबुगाते से एहसास
झिझक की परिधि में
जकड़े मूक से भाव
लेते अंगड़ाई स्वप्निल सी आँखों में
झिलमिलाते दीपों की बाती में
झांकते मेरी बड़ी बड़ी आखों में
मानो पूछ रहे हो मुझसे वो
सुनो पहचाना हमें
समझ रही हो ना तुम आहट हमारी

*************